बिचार से नफरत करे पर ब्यक्ति से नही:पीपीसी

कानून से सजा दिलाये पर कानून हाथ में नही ले सकते*
पत्रकार प्रेस क्लब के समस्त जनपद वासियों को यह अवगत कराना चाहता हूं कि पीपीसी के इस मंच पर बिना सोचे समझे कोई भी पोस्ट किसी व्यक्ति द्वारा नहीं की जानी चाहिए।पोस्ट करने वाले व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि मेरे अटपटे बयानबाजी से क्या किसी भाई को ठेस तो नही पहुंच रहा है।पहले अपने शब्दों का मूल्यांकन करें उसके बाद मंच पर शब्दों की लिखा पढ़ी करें। शब्द लिखने के बाद पुनः उसका मूल्यांकन करें कि कोई अनुचित शब्द तो मेरे द्वारा नहीं लिखी गई है। यदि आप स्वस्थ चित या विश्वास कर ले कि मेरे द्वारा लिखा गया पोस्ट सही है तभी उसको पोस्ट करें।अन्यथा किसी सूरत में किसी को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य किसी प्रकार का मैसेज पोस्ट न करें।समस्त भाइयों को अपने को यह समझना चाहिए कि हम सिर्फ पत्रकार हैं। हमारी बिरादरी पत्रकारों की है।न कि किसी जाति और धर्म की।जैसा की गौरी लंकेश के विषय में तमाम लोगों ने अपनी कुछ टिप्पणियां की। लेकिन उस टिप्पणी पर उन्होंने चिंतन और मनन नहीं किया।जैसा कि आप लोग भली भांति अवगत हैं कि पाकिस्तान के आतंकवादी बराबर भारत पर आक्रमण करते चले आ रहे हैं।भारत चाहता तो पाकिस्तान के आतंकवादियों और शरंदाताओ को दो मिनट में धूल चटा देता।लेकिन वह विश्व कानून के दायरे में बधा हैं जिसके नाते वह कानून का सहारा लेकर आतंकवादियों को मारना चाहता हैं।उसी तरीके से गौरी लंकेश भले ही किसी मायने में किसी व्यक्ति विशेष व जाति धर्म संप्रदाय की विरोधी थी तो उसके खिलाफ सिर्फ कानून को कार्यवाही और सजा देने का अधिकार है न कि हमे और आप को।
लेकिन कानून को हाथ में लेकर किसी की हत्या व नरसंहार कर देना वह कानूनन अपराध है। भारत हमेशा कानून में अपनी आस्था रखता है। और हम लोग भी उसी कानून में बधें हैं।जिसके कारण हम कानून को तोड़ नहीं सकते हैं।लंकेश की हत्या करने वालों ने कानून का खुला माख़ौल उड़ाया है।जिसे कानून उसे कभी माफ़ नही कर सकता है।क्योकि कानून के हाथ बड़े लंबे होते है। जिस दिन भारत से कानून का राज समाप्त हो जाएगा उस दिन चहुओर मारकाट शुरू हो जायेगी।तब हमारे और आप जैसे लोगो की झूठी टिपण्णी काम नही आएगी।ऐसे व्यक्तियों को हम लोग किसी कीमत पर माफ नहीं कर सकते हैं जिन्होंने पत्रकार को मौत की नीद सुला दी।हम ब्यक्ति के बिचारो से नफरत कर सकते है लेकिन ब्यक्ति से नही।हम कानून से सजा दिला सकते है।लेकिन कानून नही तोड़ नही सकते है।कानून में आस्था रखे।
आपका अनुज
*घनश्याम पाठक-प्रदेश अध्यक्ष-पत्रकार प्रेस क्लब-यूपी*
07-09-17
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*कानून से सजा दिलाये पर कानून हाथ में नही ले सकते*
पत्रकार प्रेस क्लब के समस्त जनपद वासियों को यह अवगत कराना चाहता हूं कि पीपीसी के इस मंच पर बिना सोचे समझे कोई भी पोस्ट किसी व्यक्ति द्वारा नहीं की जानी चाहिए।पोस्ट करने वाले व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि मेरे अटपटे बयानबाजी से क्या किसी भाई को ठेस तो नही पहुंच रहा है।पहले अपने शब्दों का मूल्यांकन करें उसके बाद मंच पर शब्दों की लिखा पढ़ी करें। शब्द लिखने के बाद पुनः उसका मूल्यांकन करें कि कोई अनुचित शब्द तो मेरे द्वारा नहीं लिखी गई है। यदि आप स्वस्थ चित या विश्वास कर ले कि मेरे द्वारा लिखा गया पोस्ट सही है तभी उसको पोस्ट करें।अन्यथा किसी सूरत में किसी को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य किसी प्रकार का मैसेज पोस्ट न करें।समस्त भाइयों को अपने को यह समझना चाहिए कि हम सिर्फ पत्रकार हैं। हमारी बिरादरी पत्रकारों की है।न कि किसी जाति और धर्म की।जैसा की गौरी लंकेश के विषय में तमाम लोगों ने अपनी कुछ टिप्पणियां की। लेकिन उस टिप्पणी पर उन्होंने चिंतन और मनन नहीं किया।जैसा कि आप लोग भली भांति अवगत हैं कि पाकिस्तान के आतंकवादी बराबर भारत पर आक्रमण करते चले आ रहे हैं।भारत चाहता तो पाकिस्तान के आतंकवादियों और शरंदाताओ को दो मिनट में धूल चटा देता।लेकिन वह विश्व कानून के दायरे में बधा हैं जिसके नाते वह कानून का सहारा लेकर आतंकवादियों को मारना चाहता हैं।उसी तरीके से गौरी लंकेश भले ही किसी मायने में किसी व्यक्ति विशेष व जाति धर्म संप्रदाय की विरोधी थी तो उसके खिलाफ सिर्फ कानून को कार्यवाही और सजा देने का अधिकार है न कि हमे और आप को।
लेकिन कानून को हाथ में लेकर किसी की हत्या व नरसंहार कर देना वह कानूनन अपराध है। भारत हमेशा कानून में अपनी आस्था रखता है। और हम लोग भी उसी कानून में बधें हैं।जिसके कारण हम कानून को तोड़ नहीं सकते हैं।लंकेश की हत्या करने वालों ने कानून का खुला माख़ौल उड़ाया है।जिसे कानून उसे कभी माफ़ नही कर सकता है।क्योकि कानून के हाथ बड़े लंबे होते है। जिस दिन भारत से कानून का राज समाप्त हो जाएगा उस दिन चहुओर मारकाट शुरू हो जायेगी।तब हमारे और आप जैसे लोगो की झूठी टिपण्णी काम नही आएगी।ऐसे व्यक्तियों को हम लोग किसी कीमत पर माफ नहीं कर सकते हैं जिन्होंने पत्रकार को मौत की नीद सुला दी।हम ब्यक्ति के बिचारो से नफरत कर सकते है लेकिन ब्यक्ति से नही।हम कानून से सजा दिला सकते है।लेकिन कानून नही तोड़ नही सकते है।कानून में आस्था रखे।
आपका अनुज
*घनश्याम पाठक-प्रदेश अध्यक्ष-पत्रकार प्रेस क्लब-यूपी*
07-09-17