....उस साजिश को भगवान बुद्ध, बाबा भोले नाथ बाबा काल भैरव भी नहीं सह सके

श्री घनश्याम पाठक जी की कलम से.........
वाराणसी। पीपीसी के सभी सम्मानित बड़े भाइयो को आज याद दिलाना चाहता हूँ कि जिस संगठन को हम लोगो ने तिलांजली दे दिया उस संगठन की शुरुआत भी सारनाथ के तथागत उपदेश स्थली से ही हुआ था। लेकिन तिलांजली वाले संगठन के मुखिया अपने मद में मदांत होकर भदोही के सम्मानित बड़े भाई व क्रांतिकारी पत्रकारों को अपमानित कर हम लोगों को सदा के लिए जुदा करना चाहते थे। लेकिन ईश्वर की गति को कोई टाल नही सकता है। "बलि चाहा आकाश को भेज दिया पाताल" अमुक संगठन के अहंकारी लोग भदोही, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर के साथियों के साथ अंग्रेजी निति से फुट डालकर हम लोगो को तोड़नें की साजिश कर रहे थे। उस साजिश को भगवान बुद्ध, बाबा भोले नाथ बाबा काल भैरव भी नहीं सह सके।
मित्रों सच कहा गया है कि भक्तों का अपमान भगवान भी नही सह सकते है। उस संगठन के शुरूआती दौर में मेरे साथ विनय कुमार मौर्या, पवन पाण्डेय, संतोष पाण्डेय, पवन त्रिपाठी, मुकेश मिश्रा, मदन मोहन शर्मा/बृजेश ओझा रहे और उसके बाद कारवाँ बढ़ता ही गया। आज भी पीपीसी के शुरूआती के समय भी इन्हीं साथियो के साथ सैकड़ों साथियों का साथ मिला। इतना ही नहीं वही स्थान भी पुनःमिला है। जिसे हम लोग कभी भुला नही सकते है। सर्व प्रथम हम काशी नगरी के साथ भगवान बुद्ध के तपो स्थली भूमि को हजारो बार नत मस्तक होकर बारम्बार प्रणाम करने के साथ एक संकल्प भी लेता हूँ। कि जिस तरह से भारत अपने कश्मीर के बिना नहीं रह सकता है। उसी तरीके से काशी अपने अभिन्न अंग भदोही, जौनपुर, चंदौली बिना नहीं रह सकता है। मैं इन सभी जनपदों के अपने इन क्रांतिकारी बड़े भाइयों को हृदय की अंतिम गहराइयों से प्रणाम करते हुए संगठन में भरपूर सहयोग की उम्मीद करता हूँ। जय हिन्द,जय पत्रकार,जय पीपीसी।


घनश्याम पाठक जी पीपीसी के जिलाध्यक्ष/मंडल अध्यक्ष हैं तथा अमर उजाला के पत्रकार हैं।